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युवराज गुप्ता का ३00 से लेकर इवेंट मेकर तक का सफर
September 15, 2020 • Tarun Kumar Nimesh

आपकी सेहत पत्रिका में इस अंक से विशेष एक कॉलम - 'संघर्ष का दौर - सफलता की ओर' शुरूआत करने जा रहे हैं और इस कॉलम के प्रेरक भी कोई और नहीं अभिनेता युवराज गुप्ता हैं और उनके जीवन के संघर्ष से ही हम इस कॉलम को शुरूआत कर रहे हैं और जानेंगे कि उनका 'संघर्ष का दौर - सफलता की ओर' कैसा रहा?

युवराज जी सबसे पहले आपसे हमारा सवाल है कि आपने अपने कैरियर की शुरूआत कहां से की?

कहते हैं कि असली शुरूआत जमीं से ही होती है तो हमने भी अपनी शुरूआत जमीं से की - सबसे पहले न्यूजपेपर सप्लाई का कार्य जिसकी मंथली इंकम मात्र 300/- प्रति माह थी, डोर-टू-डोर मार्केटिंग की, सरकारी आॅफिस में ठेकेदार के अंदर कार्य किया, कैटरिंग का भी कार्य किया, प्रिंटिंग लाईन से भी जुड़े,  बैंक में कार्य किया, टेलीफोन कम्पनी में भी कार्य किया, सरकार विभाग में ठेकेदारी तौर पर तकनीकी रूप कार्य किया, रेलवे में कार्य करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, फिल्म लाईन में एस्सिटेंट डायरेटर का भी कार्य किया, मॉडलिंग की दुनिया में भी कार्य किया और एक्टिंग में अपना प्रयास किया और आज उसके बावजूद बड़े संघर्ष के बाद सफलता मिलनी शुरू हुई । 

युवराज जी आपकी प्राथमिक शिक्षा कहां से हुई और आपने किस मोड़ पर अपने जीवन का लक्ष्य तय किया?

दिल्ली में कई जगह नौकरी की मगर उनमें मजा नहीं आ रहा था और फैमिली का सिस्टम फिल्मी दुनिया के अनुरूप बिल्कुल अलग था। कुछ नया करने की इच्छा थी तो फिर सोचा कुछ अलग किया जाये, पैसा तो सब जगह मिलता है लेकिन कुछ कलात्मक चाहिये था.. इसीलिए बिजनेस की योजना बनायी और फिर बहुत संघर्ष का सामना करना पड़ा - यू.आर.जे. कम्पनी का निर्माण किया जो एक प्लेंसमेंट एजेंसी के रूप में कार्य करती थी। 

युवराज जी आपकी सफलता और आज आप जिस मुकाम पर हैं उसने पाने के लिए आपने क्या किया और उसमें मुख्य भूमिका किसकी रही?

माता-पिता की महत्वूपर्ण भमिका रही।  सपनों को पूरा करने के लिए अपने परिवार से दूर तीन साल तक मुम्बई रहना पड़ा जोकि बेहद मुश्किल दौर रहा। कुछ इस तरीके के थी मेरी दिनचर्या - सुबह जल्दी उठो और जुट जाओ अपने सपनों को पूरा करने के प्रयास के लिए। दिन भर शूटिंग पर व्यस्त रहना, मध्य रात्रि में अपने निवास स्थान पर पहुंचना, और लेट होने की वजह से कुछ नहीं मिलने के कारण वड़ा पाव खाकर सोना पड़ता था। बहुत ही मुश्किल दौर था, बहुत कठिनाईयों भरा।

युवराज जी आज आप जिस मुकाम पर हैं और आज लोग आपको जानते हैं यह देख कर आपको कैसा महसूस होता है?

आज इस मुकाम पर आने के लिए बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी और अपनो से दूर और अपनो के ही खिलाफ होने के बावजूद भी कभी अपने लक्ष्य से नहीं हटा और लगता है कि अभी बहुत कुछ करना बाकि है, गर्व होता है अपनी पुरानी बातों को याद करके, लेकिन यहां लोग सिर्फ मजÞाक समझते हैं, फिल्मी दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं होता, यहां रोज अपने आपसे ही जद्दोजहद करने पड़ती है अपने सपनों लिए। 

युवराज जी आपने आज तक अपने जीवन में जो तय किया और उसको पाने के लिए आपने दिन रात मेहनत की क्या अभी वह सपना अधूरा है?

जिस दिन सपना पूरा हो जायेगा उस दिन आपका जीवन खत्म और रही बात सपनों की तो मुझे खुद से लडाई करनी है, एक बड़े उपलब्धि को हासिल करना है, जिससे आपको भी लगे कि जिंदगी में कुछ बेहद बेहतरीन किया है।

युवराज जी आपको आपके परिवार से सबसे ज्यादा सपोर्ट और सहयोग किनसे मिला?

सबसे बड़ा सपोर्ट मुझे मेरे माता-पिता से ही मिला। कुछ साथियों और रिश्तेदारों का भी धन्यवाद जिनको ये दिखाना था कि हर एक इंसान कमजोर नहीं होता उसका वक्त कमजोर होता है। 

युवराज जी आपकी संस्था द्वारा बहुत सारे कार्यक्रमों को आयोजित किया गया है कोई एक ऐसा जिसे आप हमेशा याद रखेंगे?

30 जुलाई 2019 को किया गया चौथा कार्यक्रम आयोजन किया गया वो दिन मेरे जीवन का बेहतरीन दिन साबित हृुआ। उसका मुख्य कारण था  मेरे माता-पिता का उपस्थिति, मेरा कार्यक्रम और संयोग से मेरा जन्मदिवस भी उस दिन था। परमपिता के कृपा से ये तीनों विशेष चीजें संयोग से एक साथ सम्पन्न हुर्इं। 

युवराज जी आपके जीवन के रोल मॉडल कौन है तथा आप किस फिल्म स्टार की तरह बनना चाहती हैं?

किसी तरह नहीं? लोग खुद की तरह बने! केवल सफल होना ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, वर्तमान जीवन बीते गये जीवन से बेहतर होना चाहिये तभी आदमी सफल माना जाता है। बदलते समय के अनुरूप लोग आपको नहीं आपकी औकात देखना पसंद करते हैं।

युवराज जी अभी तक आपने जितनी भी कार्य किए हैं उनमें से आपके लिए सबसे बेस्ट और सबसे अच्छा कार्य और अनुभव कौन सा रहा?

एक्टिंग से मैंने एक पूरी जिंदगी अनुभव की है।
युवराज जी आप आने वाली पीढ़ी को कोई ऐसा संदेश देना चाहेंगी जिनसे वह प्रेरित हो सके।
जिस भी चीज को करो, उसको और बेहतर करो, उससे ऊपर आपके लिए कुछ भी नहीं होना चाहिये। 3 साल का समय बहुत होता है, सफलता मिल जाती है एक समय के बाद, लेकिन उसकी गरिमा बनाकर रखना उससे भी बहुत बड़ी बात होती है।