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सब्जियों में भी छिपे हैं औषधीय गुण
January 7, 2020 • आनंद कुमार अनंत


हमारे आसपास अनेक ऐसे पेड़-पौधे होते हैं जिनका औषधीय महत्त्व बहुत अधिक है। अंग्रेजी दवाइयां जहां शरीर के किसी-न-किसी अंग पर दुष्प्रभाव डालती हैं, वहीं प्राकृतिक रूप से प्राप्त पत्ते, फल, जड़ी-बूटियां रोगों का समूल नाश करने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर उत्तम असर डालती हैं। दूसरे इनमें से अधिकांश चीजें तो हमारे घर में या रसोई में ही मौजूद होती हैं। यहां स्वास्थ्य के लिए गुणकारी और औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पतियों की चर्चा प्रस्तुत की जा रही है।


मेथीः-
मेथी के पौधे को सब्जी के रूप में खाया जाता है। खांसी, दमा एवं संधिवात के उपचार में इसका इस्तेमाल दवा के रूप में होता है। पेशाब की गड़बड़ी, कब्ज और कटिवात में भी यह लाभदायक है। मेथी के पत्तों की पुलटिस बाहरी व भीतरी सूजन में लाभकारी होती है। 


पुदीनाः-
इसके रस को प्याज के साथ मिलाकर प्रयोग करने से उल्टी की शिकायत नहीं रहती। इसके अलावा, इससे व्यावसायिक स्तर पर पिपरमिंट बनाया जाता है जो अनेक औद्योगिक उत्पाद तथा औषधियां बनाने के काम आता है।

मिर्चः-
मिर्च का पाउडर कुत्ते की काटी जगह पर लगाने से जहर बेअसर हो जाता है। इससे शरीर सुन्न हो जाने की स्थिति में तथा हैजे में भी राहत मिलती है। 


करेलाः-
करेला भले ही कड़वा होता है परंतु इसके गुणों से कोई इंकार नहीं कर सकता। इसकी जड़, पत्तियां व फल सभी उपयोगी हैं। करेले की जड़ दुखती आंख के लिए गुणकारी है। इसकी पत्तियां फंुसियों और घाव के लिए मलहम का काम करती हैं। फल व पत्तियां कीटनाशक हैं। कुष्ठ रोग, बवासीर तथा पेट के कीड़े निकालने की औषधि के रूप में भी इनका प्रयोग होता है। इसके अलावा इसे गठिया व मधुमेह रोगों में भी सेवन किया जाता है।


लसोढ़ाः-
इस फल का भारत के कुछ क्षेत्रों में अचार बनाया जाता है। गले के रोगों में इसका सेवन लाभकारी होता है, खासकर जब बलगम श्वासनली में जम गया हो तब। कब्ज दूर करने और कामोत्तेजना बढ़ाने के लिए भी इसका प्रयोग होता है।


मूलीः-
इसे सलाद के रूप में खाया जाता है। नमक के साथ कच्चा खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त होती है। यह मूत्रावर्धक होती है। गुर्दों में पथरी होने और प्लीहा के बढ़ जाने पर यह लाभदायक होती है।


लहसुनः-
इसका चूर्ण पाचक, पेट के विकारों में लाभदायक व पाचन विकृतियों के उपचार में उपयोगी होता है। मिरगी उदर-विकारों और सिरदर्द की स्थिति में इसे नमक के साथ खिलाया जाता है। गले की खराश, दमा, सामान्य पक्षाघात आदि में भी लहसुन उपयोगी होता है। दाद पर इसको मलने से आराम मिलता है।


धनियांः-
सब्जियों के स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ धनिये का प्रयोग औषधीय रूप में भी किया जाता है। इसकी तासीर शीतल मानी जाती है। यह अपच, उदर-विकारों और अम्लपित्त की गड़बड़ी की दशा में लाभदायक होता है। इसके भुने बीज मंदाग्नि में लाभ पहुंचाते हैं। त्वचा के अधिक लाल हो जाने पर धनिये का रस लगाया जाता है। यह भूख बढ़ाने वाला तथा कामोत्तेजक होता है। पिसे धनिये का लेप माथे पर करने से सिरदर्द में राहत मिलती है।