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पीठ की सुन्दरता
January 7, 2020 • Tarun Kumar Nimesh

पीठ शरीर का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। पीठ आँखों से ओझल रहती है और ओझल रहने के कारण ही इसकी उचित देखभाल का ख्याल मन में नहीं आता। पीठ भले ही स्वयं को न दिखाई देती हो किंतु दूसरों का ध्यान उस पर अवश्य जाता है। ब्लाउज के गहरे कटाव वाले गले से झांकती साफ-सुथरी कोमल एवं बेदाग पीठ जहां सबका मन मोह लेती है, वहीं दाग धब्बों और फुंसियों से भरी पीठ मन में वितृष्णा उत्पन्न करती है अतः जितना ध्यान अपने चेहरे एवं वक्षस्थल की सुन्दरता की ओर दिया जाता है, उतना ही ध्यान स्त्रिायों को अपनी पीठ की सुन्दरता की ओर भी देना चाहिए। 


पीठ पर चिकनाई पैदा करने वाली ग्रंथियां अधिक होती हैं, इसलिए उस पर झुर्रियां पड़ने की संभावना बहुत कम होती है परंतु पीठ पर अत्यधिक तैलीय तत्व होने के कारण उस पर काले मस्से उभर आते हैं, साथ ही फोड़े-फुंसियां, दाग धब्बों, कीलों आदि की समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं। इन सभी से पीठ की त्वचा का रंग बिगड़ जाता है क्योंकि पीठ पर इनके निशान पड़ जाते हैं। फुंसियों के प्रति लापरवाही बरतने पर पूरी पीठ पर इनका जाल-सा बिछ जाता है।


त्वचा चाहे चेहरे की हो या पीठ की, उसकी नियमित सफाई बहुत आवश्यक है किंतु समस्या यह होती है कि न तो पीठ स्वयं को दिखाई देती है और न ही वहां तक हाथ ही ठीक से पहुंच पाते हैं। इसके समाधान के लिए बाजार में उपलब्ध लम्बे दस्ते वाले नरम ब्रश को काम में लाना चाहिए। सूखी तुरई की जाली से भी पीठ मलने के लिए स्क्रबर बनाया जा सकता है किंतु इसे इस्तेमाल करने के लिए एक अन्य व्यक्ति की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार के ब्रश से रगड़ने से त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं। स्नान के बाद भी पीठ को तौलिए से रगड़कर पोंछना चाहिए। इससे रक्तसंचार बढ़ने के साथ-साथ रोमछिद्रों की भी सफाई होती है।


क्रीमी बैकवाश का प्रयोग भी मृत कोशिकाओं को दूर करके त्वचा में निखार लाता है। इसके लिए एक बड़ा चम्मच मिल्क आॅफ मैगनीशिया (बाजार में केमिस्ट के पास मिल जाता है) में आधा छोटा चम्मच नमक मिलाकर पीठ पर रगड़ें, फिर कुनकुने पानी से धो लें। पीठ की त्वचा का रंग अगर दाग-धब्बों के कारण सांवला पड़ जाता है तो इसके लिए हल्दी में नींबू का रस मिलाकर उबटन बना लें और इसे स्नान से पूर्व पीठ पर मलें। इससे त्वचा साफ होती है,साथ ही उस पर पड़े दाग धब्बे भी  दूर हो जाते हैं। 
चीनी, शहद, दही और अंडा मिलाकर लेप बना लें। फिर इसे ब्रश की सहायता से पीठ पर  लगाएं। सूख जाने पर रगड़कर उतार दें तथा कुनकुने पानी से धो लें। इससे काले मस्से, बड़ी कीलें इत्यादि साफ हो जाते हैं।
महीने में कम से कम एक बार पीठ की तेल से मालिश करा लेना बहुत ही लाभप्रद होता है। इससे मांसपेशियों की कठोरता दूर होकर उनका लचीलापन बढ़ता है, जिससे रक्तसंचार में वृद्धि होकर त्वचा की कांति बढ़ती है।


पीठ की त्वचा की देखभाल के साथ-साथ उठते-बैठते, खड़े होते पीठ की सही स्थिति बनाए रखने से पीठ के सौंदर्य में वृद्धि होती है, साथ ही साथ व्यक्तित्व में भी चार-चांद लग जाते हैं। 
कोई कितना भी खूबसूरत क्यों न हो, झुके कंधे और मुड़ी कमर के साथ कभी भी खूबसूरती निखर नहीं सकती और मन हीन भावना से ग्रस्त हो जाता है। थकान, तनाव और असफलता का सब से अधिक असर कमर पर ही पड़ता है, अतः उठते-बैठते, चलते-फिरते कमर को सीधा रखना चाहिए।


लगातार देर तक काम करते रहने से अक्सर कमर में दर्द होने लगता है, इसलिए पीठ की देखरेख के लिए नियमित व्यायाम भी बहुत आवश्यक है। मजबूत पीठ शरीर की शान होती है। यह सिर्फ शरीर को सहारा ही नहीं देती बल्कि पेट की मांसपेशियों में भी कसाव लाती है। पीठ की मांसपेशियों की मजबूती और लचक, सही मुद्रा तथा खूबसूरती बरकरार रखने के लिए नियमित व्यायाम बहुत आवश्यक है। इसके लिए भुजंगासन, शलभासन आदि व्यायाम बहुत लाभदायक सिद्ध होते हैं।


थकान भी पीठ में दर्द उत्पन्न कर देती है। थकान को दूर करने के लिए कंधों को धीरे-धीरे आगे लाएं, फिर पीछे ले जाएं। कुछ देर इसी तरह करते रहें। इससे थकान दूर होती है और नई स्फूर्ति मिलती है। थकान  दूर करने के लिए कंधों पर से बांहों को वृत्ताकार घुमाएं अथवा आगे-पीछे ले जाते हुए भी झुला सकते हैं। झुलाते वक्त बांहों को पीछे की तरफ ले जाएं। इससे कमर की अनेक परेशानियां दूर होती हैं, साथ ही नितम्ब एवं वक्षःस्थल का भी सौन्दर्य बढ़ सकता है।


कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि चुस्त ब्रा पहनने से पीठ की ग्रन्थियां अधिक दबती हैं जिससे पीठ में अनेक प्रकार की परेशानियां उत्पन्न हो जाती हैं इसलिए पीठ की परेशानियांे से बचने के लिए तथा उसकी सुन्दरता को निखारने के लिए चुस्त ब्रा नहीं पहननी चाहिए। रात को ब्रा को खोलकर सोना भी हितकर होता है। पीठ की उपेक्षा करना सम्पूर्ण सौंदर्य की उपेक्षा करना माना जाता है अतः पीठ के प्रति चेतना जाग्रत करके सम्पूर्ण सेहत एवं सौन्दर्य को बनाए रखा जा सकता है।