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हौंसले हो बुलंद तो मंजिले आसान होती हैं : पूजा अलाहन
July 17, 2019 • Anil Arora

हरियाणा में जहां महिलाओं का स्तर पुरुषों की तुलना में काफी कम है जिसका कारण है हरियाणा में महिलाओं को ज्यादा तवज्जों नहीं देना। ऐसी न जाने कितनी रूढ़िवादी बातों को दरकिनार करते हुए हाल ही में बहुमुखी प्रतिभाशाली एस्सिटेंट प्रोफेसर पूजा अलाहन ने ब्यूटी कांटेस्ट में ताज अपने नाम कर ये दिखा दिया कि वे खूबसूरत ही नहीं बल्कि समझदार और पढ़ी लिखी युवा महिला हैं। पूजा जी ने असिस्टेंट प्रोफेसर चयन हेतु हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल किया है।

पूजा जी फिलहाल राजकीय महिला महाविद्यालय, सेक्टर 14 पंचकूला में (हिन्दी विभाग) एस्सिटेंट प्रोफेसर का पदभार संभाल रही हैं। इनकी बचपन से ही सांस्कृतिक गतिविधियों में रूचि अधिक होने के कारण इन्होंने स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में राज्य एवं राष्टÑीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में प्रथम स्थान (उत्तम अभिनेत्री एवं नर्तकी) प्राप्त किये हैं।

साहित्य के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान के कारण इन्हें 'भारतीय दलित साहित्य अकादमी राष्टÑीय पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है। इन्होंने कुछ समय पत्रकारिता में कार्य किया है, इन्होंने अप्रैल 2019 में मिसेज इंडिया क्वीन आॅफ सब्स्टेंस में 'मिसेज इंडिया इंडियन फेस 2019' का खिताब हासिल किया, और हाल ही में आयोजित एमवाईके मीडिया द्वारा आयोजित मिस एण्ड मिसेज हरियाणा 2019 प्रतियोगिता में इन्होंने प्लेटेनियम कैटेगिरी में 'मिसेज हरियाणा 2019' का खिताब भी हासिल किया।

पूजा रानी जोकि हरियाणा के भिवानी जिले में जन्मी और इनका बचपन हरियाणा के हिसार जिले के हाँसी कस्बे में बीता। ये बचपन से एक मध्यम परिवार में पली-बढ़ी हैं, इन्होंने अपनी माँ को हमेशा त्याग और समर्पण भाव से परिवार में चार भाई-बहन सहित सभी जिम्मेदारियों को निभाते देखा है।

इनका मानना है कि किस प्रकार एक स्त्री परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते खुद का सारा जीवन समर्पित कर देती है। समाज की रूढिवादी सोच उसे स्वतंत्रता का अधिकार नहीं देती है। अच्छी पढाई के साथ इनकी सोच, इनके सपने बहुत ही बड़े थे। जब भी ये किसी कामयाब इंसान को देखती तो भीड़ से अलग हटकर अपनी अलग पहचान बनाने पर इनका मन बार-बार कचोटता। अपना कड़वा अनुभव बताते हुए पूजा जी ने बताया कि स्कूल के अंग्रेजी अध्यापक शर्मा जी द्वारा बार-बार जातिसूचक शब्दों के कटाक्ष करना एक प्रथम कक्षा की छोटी सी बच्ची का मानसिक शोषण इन्हें आज भी रूलाता है। बचपन से इन्हें जातिसूचक और आरक्षण जैसे शब्दों का प्रयोग कर इनका मानसिक पतन किया गया मगर इन्होंने उन सभी रूढ़िवादी और मंद-अंध लोगों को दिखा दिया कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं। इन्होंने शिक्षा एम.ए.(हिन्दी), एम.एम.सी.(मॉस कोम), बी.एड., एस.सैट., यू.जी.सी.(नेट.), एम.फिल.(हिन्दी) किया और वर्तमान में पी.एच.डी. पंजाब यूनिवर्सिटी से कर रही हैं।

पढाई और जीवन के लक्ष्य को पाने की दौड में इनकी शादी का दबाव निरंतर बढ़ने लगा। मगर रूढ़िवादी सोच और खास कर हरियाणा जैसे प्रदेश में इनकी सोच और विचार क्या मायने रखते हैं? इनका विवाह इस शर्त पर करा दिया गया कि इनकी आगे की पढाई जारी रखी जायेगी। जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है ठीक उसी प्रकार का व्यवहार इनके प्रति ससुराल पक्ष का रहा मगर इन्होंने प्राचीन और रूढ़िवादी सोच को दरकिनार कर अपनी पढाई दो साल बाद फिर शुरू की और जून 2013 में नेट की परीक्षा पास की, नीट की परीक्षा पास करते ही इनका आत्मविश्वास कई गुÞणा बढ़ा और माता-पिता के सहयोग से देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा से बी.एड. की डिग्री हासिल की। मुसीबतों के दौर में भी उसके बाद एम.फिल हिन्दी में 75 फीसदी से की।

 

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में इन्होंने पीएचडी (हिन्दी) एडमिशन लिया, अब तक इनके 10 शोध पत्र राष्टÑीय और अंतर्राष्टÑीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। कहते हैं - खिलाडी मैदान में तभी उतरे जब मैदान के चारों खाने चित्त कर सके और सन 2016 में खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजकीय महाविद्यालय पंचकूला में एक्सटेंशन एसिसटेंट प्रोफेसर (हिन्दी) की जॉब हासिल की। इतने कठिन दौर और परिश्रम के पश्चात भी इन्होंने अपना मातृत्व भी बखूबी निभाया इनकी बेटी महिका जोकि 8 साल की है, उसकी परवरिश में कोई कमी न रखी। ये नहीं चाहती कि इनकी तरह अन्य महिलाओं का शोषण और दमन हो, सभी महिलायें अपनी सोच को स्वतंत्र रखें।

इतना कठिन परिश्रम और लंबा समय बिताने के पश्चात अपने सपनों को पूरा करने का समय आ गया। इन्होंने एम.वाई.के. मीडिया द्वारा आयोजित मिस एण्ड मिसेज हरियाणा 2019 प्रतियोगिता भाग लिया और 'मिसेज हरियाणा 2019 ' का खिताब अपने नाम किया। मिसेज इंडिया क्वीन आॅफ सब्सटेंस 2019 प्रतियोगिता में 'मिसेज इंडिया इंडियन फेस 2019' का खिताब भी जीता।

आज पूजा जी ने समाज में खुद को कामयाब और प्रतिष्ठित महिला के रूप में साबित कर दिखाया है। बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर को अपना आदर्श मानने वाली पूजा उनके पद चिन्हों तथा उनके सिद्धांतों पर चलकर ही आज अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता का परचम लहरा रही हैं। इन्होंने शिक्षा, नौकरी, सुंदरता आदि हर क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र सोच, समझदारी, आत्मविश्वास, धैर्य, सहनशीलता, स्वाभिमान, दूरदर्शिता, समर्पित स्वभाव आदि का लोहा मनवा लिया है। पूजा जी ऐसी महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं जोकि परिवार, ससुराल या फिर कभी समाज की उम्मीदों को पूरा करते-करते गुमनामी में खो जाती हैं और अपने अस्तित्व को भुला देती हैं।

पूजा सभी महिलाओं को ये संदेश देना चाहती हैं कि सबसे पहले खुद पर विश्वास करो, किसी को भी खुद पर इतना अधिकार न दो कि तुम्हारे व्यक्तिगत निर्णय लेने का तुम्हारा हक समाप्त हो जाये। सबकी इज्जत करो, परन्तु जब लगे कि तुम्हारी सोच को दबाया जा रहा है तो उसके खिलाफ स्वतंत्र आगाजÞ करो।

आज जहां महिला सशक्तिकरण की बात होती हैं तो महिलायें पहले ही सशक्त है क्योंकि वे पुरुषों को जन्म देती हैं, जिसे महिलाओं से श्रेष्ठ समझा जाता है परन्तु जरूरी नहीं कि परिवार का साथ पाकर महिलायें कामयाबी के शिखर पर पहुंच सकती हैं। समाज में 'बेटी-बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के साथ-साथ बहुओं को भी बेटी मानकर 'बहू बचाओ-बहू पढ़ाओ' के नारे को सार्थक करना बहुत आवश्यक है। समय के परिवर्तन के साथ-साथ देश की महिलायें हर क्षेत्र में अपना अच्छा प्रदर्शन कर रही हैंं। पूजा जी उन सभी लोगों से विनती करती हैं जोकि महिलाओं के प्रति रूढिवादी सोच रखते हैं - 'अपनी बहू-बेटी के मन की विचारधारा को समझें क्योंकि उन्हें भी देश के विकास में योगदान देने के लिए स्वतंत्र निर्णय लेने का और अपनी पहचान बनाने का पूरा हक है'।