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स्वस्थ्य शरीर के लिए आवश्यक है विटामिन
May 21, 2019 • उमेश कुमार साहू

जिस प्रकार शरीर में विकास, शक्ति स्फूर्ति और पुष्टता के लिए प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइडेªट तथा खनिज लवण आदि आवश्यक हैं, उसी प्रकार शारीरिक दुर्बलता, रोग आदि को दूर करने के लिए विटामिनों की आवश्यकता होती है।


यदि आवश्यक विटामिन जीवन भर मनुष्य को मिलते रहें तो मनुष्य निरोगी, तेजस्वी और दीर्घायु जीकर जीवन के समस्त आनंद का उपभोग कर सकता है। आइए जानें, विटामिनों के प्रकार तथा उनकी उपयोगिता के बारे में:-


विटामिन 'ए':- हरी सब्जियों, ताजे फलों, दूध, दही, मक्खन, मलाई, छाछ, पनीर, गाजर, टमाटर तथा बंदगोभी आदि में विटामिन 'ए' प्रचुर मात्रा में पाया जाता। शारीरिक विकास एवं हड्डियों की मजबूती के अलावा आंखों के लिए विटामिन 'ए' अत्यंत आवश्यक है। क्षय रोगी के लिए विटामिन 'ए' अत्यंत आवश्यक है। क्षय रोगी के लिए विटामिन 'ए' बहुत जरूरी है।


विटामिन 'बी':- केला, अंगूर, सेबफल, नाशपाती, नारंगी, टमाटर, दूध, मूंगफली, किशमिश, प्याज, लहसनु आदि में विटामिन 'बी' की अत्यधिक मात्रा पाई जाती है। विटामिन 'बी' बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आश्यक हैं। यदि शरीर में विटामिन 'बी' की कमी हो जाए तो पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है।


विटामिन 'सी':- ताजे फलों, हरी सब्जियों तथा दूध में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। विटामिन 'सी' की शरीर में कमी होने पर मसूड़ों और दांतों के रोग पैदा हो जाते हैं।


विटामिन 'डी':- विटामिन 'डी' उन्हीं खाद्य पदार्थों से प्राप्त होता है जिनमें विटामिन 'ए' की मात्रा अधिक होती है। सबसे अधिक विटामिन 'डी' सूर्य की किरणों से प्राप्त होता है। शरीर को कांतिवान, कोमल और मृदु बनाने के लिए विटामिन 'डी' अत्यंत आवश्यक है।


विटामिन 'ई':- हरी सब्जियों जैसे मेथी, पालक और चोकर सहित आटे, मक्खन, दूध, घी आदि में यह विटामिन अधिक मात्रा में पाया जाता है। सन्तानोत्पत्ति की शक्ति और पुरूषत्व को बढ़ाने में यह विटामिन बहुत सहायता करता है।


विटामिन 'के'ः- विटामिन 'के' की कमी से रक्त की गति असामान्य हो जाती है और शीत पित्त हो जाता है। जिन लोगों में इस विटामिन की कमी होती है, यदि उन्हें चोट लग जाए तो बहते हुए खून को रोकना कठिन हो जाता है।

यह विटामिन हरी पत्तेदार सब्जियों, सोयाबीन तेल तथा लिवर में पाया जाता है। यह मनुष्य की आंतों में जीवाणुओं द्वारा भी संश्लेषित होता है।


विटामिन 'जी':- विटामिन 'जी' की कमी से मनुष्य की त्वचा रूखी और खुरदरी हो जाती है। नाखूनों के रोग पैदा हो जाते हैं।
यह विटामिन ताजा सब्जियों, फलों, दूध और अण्डे तथा बादाम और अनार में सबसे अधिक पाया जाता है।