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महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल हैं दीपिका बाली
April 24, 2019 • Anil Arora

 

दीपिका बाली एक साधारण चुलबुली और हंसमुख महिला है, इनकी आँखें सपनों से भरी है।  ये सशक्त महिलाओं के परिवार में पैदा हुई हैं, जहाँ इनकी दादी पहली महिला फार्मासिस्ट थीं और इनकी माँ एक शिक्षिका और एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं। इनका मानना है कि बचपन का प्रभाव हमेशा सबसे मजबूत होता है क्योंकि वे आपको अपनी उपलब्धियों  को पूरा करने के मार्ग पर चलने के लिए प्रकाश देता है।

 

बहुआयामी होने के नाते ये पढ़ाई और खेल दोनों में अच्छी थी।  इन्होंने राज्य स्तर पर बैडमिंटन खेलती थीं और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेती थीं। सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ मैंने अपना मास्टर्स इंग्लिश (आॅनर्स) और अंग्रेजी में बी.एड भी पूरा किया है। दयालु रूप से कार्य करना मेरे जीवन का मूल मंत्र है। इन्होंने 2007 में रोटरी इंटरनेशनल ज्वाइन किया और एक प्रमुख पहल भी की जिसका मकसद था कि जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा प्रदान करना। पेशेवर रूप से मैं अपने युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा प्रदान कर रही हूं।

 

 

एनआईआईटी के साथ काम करने के बाद  दीपिका बाली अपनी एकेडमी 'रङकछछे' चला रही हैं, जिसमें जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। इनके जीवन का वास्तविक मोड़ तब आया, जब इन्हें अंतर्राष्ट्रीय इनरव्हील जो 100 से अधिक देशों में महिला का समर्थन करने वाली दूसरी सबसे बड़ी संस्था है। इन्हें इनरव्हील गाजिÞयाबाद के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है और ये महिला सशक्तिकरण के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इन्हें समाज के प्रति मेरे योगदान के लिए कई पुरस्कार मिले हैं। इनके खुशहाल वैवाहिक जीवन के 24 साल पूरे हो चुके हैं, इनके पति परमेश्वर रवि बाली बीसीएन मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और निदेशक हैं तथा मेरे जीवन में वास्तविक प्रेरक कारक रहे हैं। दीपिका बाली एक बेटा रोहित बाली की माँ हंै, जो बिजनेस एनालिटिक्स में मास्टर्स कर रहा है और इनकी एक खूबसूरत बेटी मानवी बाली है जो एमिटी यूनिवर्सिटी में पढ़ रही है।