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दांतोमें टीस की वेदना
September 11, 2018 • Tarun Kumar Nimesh

कुलदीप पाराशर
दांतों की बाहरी परत के घिस जाने या ऊपरी परत के क्षरित हो जाने से मीठा या खट्टा खाने पर एवं गर्म चाय या ठंडा पानी पीने से दांतों में टीस की वेदना होती है। तब हवा लगने से भी कष्ट होता है। इसे दांत खट्टे होना या दांतों को ठंड लगना कहा जाता है।
खाने, पीने एवं चबाने की अपनी गलत आदतों के कारण दांतों की रक्षा के लिए बनी ऊपरी कठोर परत घिस या क्षरित हो जाती है तब यह वेदना की कष्टकर स्थिति आती है। दांतों के ऊपर की इस कठोर परत को एनेमल कहते हैं जो दांतों के भीतर के संवेदनशील भाग को ढके रहते हैं।
एनेमल के भीतर एक परत और होती है जिसे डंेटीन कहते हैं। यह परत भी घिस जाती है तो पल्प आ जाता है। दांतों के अंदर पल्प होता है जिसमें नर्व (तंत्रिका) होता है। एनेमल एवं डंेटीन दोनों परत के घिसने के बाद पल्प का नर्व किसी भी पदार्थ के संपर्क में आने पर टीस की वेदना पैदा करते हैं। ये ठंडा, गर्म, खट्टा, मीठा या हवा के संपर्क में आकर दर्द से बेचैन कर देते हैं।

कारण -
टीस के कई कारण हैं जैसे दांतों का सड़ना, त्रुटिपूर्ण विधि से दांत घिसना या रगड़ना, सुपारी, गुटका खाना या कठोर चीजों को ज्यादा चबाना, कोल्ड ड्रिंक्स एवं मीठे पेय अधिक पीना, एसिडिटी एवं खट्टी डकारों का आना, सोते समय दांत किटकिटाना आदि।
बच्चों, युवाओं एवं किसी के द्वारा दांत साफ करते समय कठोर ब्रश का उपयोग करने एवं जोर लगाकर अधिक समय तक रगड़-रगड़कर दांत साफ करने से उसकी ऊपरी परत एनेमल एवं डंेटीन घिस जाती है।
सुपारी, गुटखा या कठोर चीज अधिक चबाकर खाने से भी ऐसा होता है।
एसिडिटी बढ़ाने वाले भोजन की अधिकता से लार का खट्टापन दांतों की ऊपरी परत को क्षतिग्रस्त कर देता है।
कोल्ड ड्रिंक्स, मीठा पेय एवं अत्यधिक खट्टे पदार्थ भी दांतों की ऊपरी परत की क्षरित कर देते हैं।
कुछ लोगों को सोते जागते दांत बजाने या किरकिटाने की आदत होती है उनके साथ भी ऐसा होता है।
मीठा खाने, च्यूइंगम या पेंसिल आदि चबाने वाले के साथ भी यह हो सकता है।

दांतों का पीलापन -
पान, सुपाड़ी, तंबाकू, गुटका अधिक खाने से दांत पीले व काले हो जाते हैं। धूम्रपान की अधिकता से दांत गंदे हो जाते हैं। गुड़ाखू एवं काले लाल दानेदार दंतमंजन से दांत बदसूरत हो जाते हैं। अधिक ब्रश करने से दांत पीले हो जाते हैं। खट्टे पदार्थ, एसिडिटी वाले तत्व, कोल्ड डिंªक्स, मीठा पेय की अधिकता से दांत मटमैले हो जाते हैं। मदिरा आदि नशे का सेवन करने से दांत काले पीले हो जाते हैं।
कुछ दवाओं के प्रभाव से एवं कैल्शियम की कमी से भी ऐसा होता है। दांत का मूल रंग ईश्वर प्रदत्त होता है। जिस प्रकार प्रकृति के अनुसार हमारी त्वचा एवं बाल का रंग होता है, उसी तरह दांतों का मूल रंग सफेद या हल्का पीला होता है। सांवले या काले रंग की त्वचा वालों के दांत सफेद होते हैं जबकि गोरी त्वचाधारी लोगों के दांत हल्के पीले हल्के भूरे या हल्के स्लेटी रंग के होते हैं।
क्रीम उबटन से त्वचा चमकाने एवं बालों का रंगने की तरह कास्मेटिक डंेटिस्ट्री की सहायता से दांतों का रंग रूप बदला जा सकता है। इन दांतों की सतह पर लेमिनेशन कराकर दांतों पर पसंदीदा रंग पाया जा सकता है।

दांतों में टीस की वेदना से बचाव-
पान, सुपाड़ी, गुटका, तंबाकू त्याग दें।
धूम्रपान, नशापान न करें।
अधिक खट्टी चीजें, अम्ल वाली चीजें, मीठे पेय त्याग दें या कम कर दें।
कड़ी चीजें जोर देकर न चबाएं।
दांत बजाना, किटकिटाना बंद कर दें।
सुपर या अल्ट्रा साफ्ट ब्रश हल्के से करें।
दांतों की ऊपरी कठोर परत एनेमल एवं डेंटीन को हर हाल में बचाएं।
दवायुक्त टूथ पेस्ट एवं माउथवाश उपयोग करें।
यदि दांतों में टीस हो तो रूट कैनाल इलाज कराएं।