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जरूरी है ऊनी वस्त्र की देखभाल
February 3, 2019 • Pushpa Devi

सर्दियां शुरू होते ही ऊनी वस्त्रों की खरीदारी शुरू हो जाती है लेकिन सही पहचान न होने पर कई बार ग्राहक लोभी हो जाते हैं। असली व टिकाऊ माल कीमती होता है। इस कारण इनकी उचित देखभाल भी जरूरी है।

ऊनी वस्त्र लेने से पूर्व जान लें कि शुद्ध ऊन से निर्मित वस्त्र नमी व पसीना सोख लेते हैं और पहनने वाले को आरामदेह लगते हैं। ऐसे स्वेटर फैलते नहीं और धुलने के बाद वास्तविक मौलिक आकार में आ जाते हैं जबकि नायलोन या सिंथेटिक यार्न से बने स्वेटर जिनमें विस्कोस मिलाया जाता है, यद्यपि देखने मंे अत्यंत आकर्षक प्रतीत होते हैं पर जल्दी खराब हो जाते हैं। एक-दो धुलाई के बाद ही कपड़े की चमक फीकी पड़ जाती है, अतः खरीदारी करते समय काफी सतर्क रहें। लेबल अच्छी तरह पढ़ें और प्रतिष्ठित दुकान से ही खरीदें।

ऊनी वस्त्रों को खरीद लेने के बाद उनकी उचित देखभाल भी बहुत जरूरी है। कुछ लोग समझते हैं कि जाड़े का मौसम खत्म होने पर गरम कपड़ों को ड्राईक्लीन करवाना और नैप्थलीन की गोलियों में रखना ही उनकी सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त है पर ऐसा नहीं है। इनके रोजमर्रा के इस्तेमाल में भी इनकी अच्छी सार-संभाल की जरूरत है। अंतर्राष्ट्रीय ऊन सचिवालय के अनुसंधानकर्ताओं ने यह तथ्य स्थापित किया है कि अगर ऊनी कपड़ों की वैज्ञानिक रीति से प्रतिदिन देखभाल की जाए तो वे काफी समय तक अच्छी हालत में रह सकते हैं।

गरम पानी ऊनी कपड़ों का जन्मजात दुश्मन है। कपड़ों को पानी में ज्यादा देर न भिगोएं। इससे वे कमजोर होते हैं और ऊन की प्राकृतिक क्षमता भी क्षीण लगती है। सूखे गरम कपड़े को खींचने पर वह अपनी वास्तविक शक्ल में आ जाता है पर गीला कदापि शेप में नहीं आएगा, अतः वार्डरोब में रखने से पूर्व अगर कपड़े अच्छी तरह नहीं सूखते तो रेशे कमजोर होने लगते हैं। कीड़े-मकोड़े और काक्रोच को भी नमी वाले कपड़ों में निवास करना सुरक्षित लगता है, अतः कपड़े रखते समय जरा-सी भी नमी रह गई है तो कीड़े-मकौड़ों को कपड़े खाने का मौका मिल जाता है।

धोने के बाद और गर्मियों में पैक करने से पूर्व कपड़ों को अच्छी तरह सुखाएं। ड्राईक्लीनर के यहां से लाने पर भी गरम कपड़ों को दो घंटे धूप व हवा में अवश्य टांगें। कभी भी कपड़ों को लापरवाही से तह न करें। गलत तह के निशान बड़ी मुश्किल से जाते हैं। बहुत से लोग गलत तह के निशानों और सलवटों पर भारी गरम इस्तरी बार-बार फेरते हैं। ऐसा करके वे स्वयं उस स्थान से कपड़ा फटने का खतरा मोल लेते हैं। गहरी सलवटें दूर करने के लिए निम्न वैज्ञानिक रीति अपनाएं:-

  • एक बाल्टी में गरम पानी भरकर उसकी भाप पर सलवटों वाला हिस्सा रखें। 10-15 मिनट बाद कपड़े को भाप से उठाकर समतल सतह पर हाथ से एकसार करें, तत्पश्चात् हवा में टांग दें। इस प्रक्रिया से गरम कपड़ों की सलवटें हट जाएंगी।
  • गरम कपड़ों पर अधिकतर तरल पदार्थ व चिकनाई वाले तत्वों से ही धब्बे पड़ते हैं। जैसे ही किसी कपड़े पर धब्बे दिखाई दें, उनका उपचार शुरू कर दें। इन धब्बों को छुड़ाने में जितनी देर होगी, चिकनाई उतनी ही कपड़ों में घुसती जाएगी और मुश्किल से छूटेगी। धब्बे छुड़ाने के लिए पहले धब्बे के नीचे साफ कपड़े का टुकड़ा रखें, फिर रूई को पेट्रोल या किसी बढ़िया डिटरजेंट में भिगोकर हल्के हाथ से साफ करें। इस प्रक्रिया को 2-3 बार दोहराएं, फिर कपड़े को हवा में सूखने के लिए टांग दें।
  • कभी भी ऊनी कपड़ों को निचोड़ें नहीं। इससे कपड़े के रेशे टूटते हैं और उसका टिकाऊपन 50 प्रतिशत कम हो जाता है।
  • कभी भी गीले वस्त्रों को तार पर न टांगें। हमेशा समतल सतह पर फैलाकर सुखाएं। इससे वास्तविक डिजाइन और आकृति नहीं बिगड़ती। जल्दी सुखाने के लिए कपड़ा ब्लाटिंग पेपर या तौलिए के बीच रखकर सुखाएं।
  • कभी भी रंगीन ऊनी वस्त्र धूप में न सुखाएं। इससे रंग उड़ सकता है, धब्बेदार हो सकता है व कपड़ा सिकुड़ सकता है।