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औरत का असली आभूषण है नम्रता
February 3, 2019 • Sheela Devi

कहते हैं नम्र एवं मधुर भाषा से हम दुश्मन तक का दिल जीत सकते हैं। आज की बेटी कल की पत्नी और मां है। उसे एक नए संसार एवं घर परिवार का सृजन करना होता है। बेटी के रूप में मां बाप का घर स्वर्ग बनाती है, पत्नी के रूप में पति का नीड़ सजाती है और मां के रूप में कल का नागरिक बनाती है। परिवार में यदि मां गुणमयी है तो बच्चे सद्गुणी होंगे। एक औरत कई परिवार बनाती है, अतः नम्रता एवं सदाचार लड़की का प्रथम गुण होना चाहिए।

औरत ही घर को स्वर्ग या नर्क बनाती है। घर में परस्पर हमारा व्यवहार एवं बोलचाल ही परिवार का वातावरण बनाता है।

हमारी कटु एवं तीव्र वाणी से परिवार का माहौल गर्म होते देर नहीं लगती।

नम्रता एक ऐसा गुण है जिससे आप अपने शत्रु को भी मित्र बना सकती हैं। नम्रता का अभिप्राय है कि बड़ी ही मधुर भाषा में नपे-तुले शब्दों में छोेटे या बड़ों से अपनी बात कहना। सभ्यता एवं शिष्टाचार की परिधि को पार न करना ही नम्र स्वभाव कहलाता है। बड़ी से बड़ी बात भी मधुर वाणी में कहीं जाए तो उसका प्रभाव बहुत जल्दी बहुत ज्यादा होता है।

नम्रता दूसरों को जीतने की कला है। स्वभाव का लचकीलापन ही नम्रता कहलाता है।

जीवन में किसी से शत्रुता करना या बैर करना अपने विकास को रोकना है। कई लोग तो सारा जीवन अपने शत्रु के लिए जीते हैं। अपने बारे में सोचने का ज्ञान ही नहीं रहता और शत्रुता का अंत शत्रु के जीवन के साथ ही होता है। नम्र बन कर शत्रु को अपना बना कर दोनों सुखी हो सकते हैं।

पारिवारिक हिंसा सदा फूट डालती है, भेद भाव बढ़ाती है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि हिंसा पर नम्रता एवं प्यार से विजय पाई जा सकती है।

जो दूसरों पर अत्याचार करता है, वह अभागा है क्योंकि जब उस पर, स्वयं पर विपत्ति आती है, तब उसके अपने भी उससे दूर भाग जाते हैं।

भगवान ने हमें यह जीवन लड़ने झगड़ने के लिए नहीं दिया। यह हम पर निर्भर करता है कि अपनी वाणी से अपनों को बेगाना बना लेते हैं या बेगानों को भी गैर बना देते हैं।

घर परिवार का वातावरण सिर्फ औरत, पत्नी या मां पर निर्भर नहीं करता अपितु परिवार का प्रत्येक सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करे। एक-दूसरे की भावनाओं की कद्र करते हुए नम्र भाव, सद्भाव एवं मधुरभाषी बनें।

कोई भी घर ईंट-सीमेंट से नहीं बनता बल्कि सजग एव श्रेष्ठ इंसानों से बनता है जो एक दूसरे का ख्याल रखें, प्यार करें और एक दूसरे के काम आयें।

यदि हम नम्र हैं तो सभी हमें प्यार करेंगे, पसंद करेंगे। यदि हम कड़वें वचन बोलते हैं, उग्र हो जाते हैं, बात-बात पर क्रोधित हो जाते हैं तो अपना जीवन नर्क बना लेते हैं। यह सब आपके हाथ में है।