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अगर पति हों सेक्स एडिक्ट?
February 3, 2019 • Tarun Kumar Nimesh

 

विधवा मां की बीमारी की खबर सुन राधिका जो उनकी इकलौती संतान थी, उनकी देखभाल के इरादे से फौरन दिल्ली के लिये रवाना हो गई। पीछे से पति कृष्णा के लिए उसने ढेर सी हिदायतें दीं और खाने का इंतजाम भी एक जान पहचान के कुक के माध्यम से कर दिया था, यानी कृष्णा को पीछे कोई परेशानी नहीं होती लेकिन राधिका के गुस्से और हैरानी की सीमा न रही जब आधी रात को कृष्णा भी ससुराल पहुंच गया। बिस्तर में यह कहते हुए जब उसने राधिका को पास खींचना चाहा कि जानम, तुम्हारे बग़ैर नींद नहीं आ रही थी तो राधिका ने पति का मंतव्य समझते हुए दूसरी ओर मुंह फेर लिया। उसकी आंख में आंसू तैरने लगे थे। इधर मां इतनी बीमार हैं, तबियत पूछने या फिक्र करने के बजाय इन्हें यह सब सूझ रहा है।

एक राधिका ही नहीं, ऐसी न जाने कितनी स्त्रियां होंगी जिन्हें पति से ऐसी शिकायत होगी। पत्नी को चाहना एक बात है, कामुकता अलग बात है।

बायलाॅजिकली यह एडिक्शन एक रोग की श्रेणी में आता है। इस व्याधि का कारण हारमोन, डी. एन. ए. संरचना व क्रोमोजोम की संख्या में निहित है। टेस्टीस्टेरोन हारमोन की अधिकता पुरूषों की सेक्स की इच्छा बढ़ाती है। इस एडिक्शन का मनोवैज्ञानिक पहलू देखा जाए तो इसका संबंध बचपन की यादों से जुड़ा हो सकता है। उपेक्षित बचपन होने पर मन में जो ग्रंथियां बन जाती हैं, उसके कारण व्यक्ति सेक्स को ही प्यार का आधार मान बैठता है। कभी बचपन में किसी लड़के के साथ यौन अनुभव हुआ हो या घर में बहुत पुरातनपंथी वातावरण होने के कारण पाबंदियां रही हों और सेक्स को पाप समझा जाता हो, वहां बच्चे सेक्स को लेकर ज्यादा उत्सुक बन जाते हैं।

वे इधर उधर अश्लील किताबों, इंटरनेट, केबलटीवी आदि से जानकारी इकट्ठी करते हैं। यह एक तरह से उनकी कमजोरी बन जाती है। नियंत्रण न रहने पर वे सेक्स के लती बन जाते हैं। अपनी इस भूख को शांत करने के लिये वे कालगल्र्स के चक्कर मंे फंसकर एड्स जैसी बीमारी लगा लेते हैं या अन्य तरह से संक्रमित हो जाते हैं।

कमज़ोर विलपावर के लोग यार दोस्तों के बहकावे में आकर शराब और ड्रग्स की तरह सेक्स के लती हो जाते हैं। वे नये-नये अप्राकृतिक ढंग से एक्सपेरिमेंट करते हैं और अय्याशी में न केवल पैसा बल्कि स्वास्थ्य भी गवां बैठते हैं। रिश्ते दांव पर लग जाते हैं और वे समाज की मुख्यधारा से कट जाते हैं।

निवारण भी है:- कोई समस्या ऐसी नहीं होती जिसका हल न हो। एडिक्शन हो गया है तो डिएडिक्शन भी हो सकता है। बस मन मज़बूत होना चाहिए।

कहते हंै खाली दिमाग शैतान का घर होता है। व्यक्ति अपने को व्यस्त रखे, फिर वो चाहे पैसा कमाने में या कला या किसी अन्य रचनात्मक कार्य में हो तो व्यक्ति का मन काबू में रहता है। अपने को सिर्फ देह तक ही लिप्त रखा जाए तो दिमाग यही भाषा समझने का आदी बन जाता है।

ऐसा व्यक्ति सभी की घृणा का पात्र बन जाता है। कुछ नहीं बचता है उसके पास, न मान, न मर्यादा, न किसी का प्यार। अनचाहा नाकारा वह समाज पर बोझ मात्र बनकर रह जाता है।

सेक्स एडिक्शन गंभीर मानसिक समस्याएं पैदा कर सकता है। स्किज़ोफ्रेनिया या बायपोलर डिसआॅर्डर जैसी बीमारियों का कारण कई बार सेक्स एडिक्शन होता है। दिमागी संतुलन का खोना जैसी बीमारी की शुरूआत सेक्स एडिक्शन हो सकती है।

काउंसलिंग से इस लत से छुटकारा पाया जा सकता है। फ्री सेक्स के इस युग में कामुकता को बढ़ावा मिलता है। चारों तरफ जिधर निगाह डालिये, सेक्स से जुड़ी बातें पढ़ने देखने को मिलेगी। हर मैग्जीन, अखबार व टी वी प्रोग्राम में सेक्स रिलेटेड मैटर पढ़ा देखा जा सकता है। बलात्कार के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। कहीं न कहीं अक्सर ही किसी सेक्स रैकेट का पर्दाफाश होता है। इसे डिमांड एंड सप्लाई मानें या सप्लाई एंड डिमांड मानें।

पुरूष को इस मानसिकता से छुटकारा पा लेना चाहिए कि हायपोसेक्सुएल होना पौरूषत्व की निशानी है। यह पौरूष की निशानी नहीं बल्कि बीमारी है जिसका इलाज अन्य बीमारियों की तरह ही जरूरी है। पत्नी को चिढ़ने व नफरत करने के बजाय पति को ऐसे में सहयोग देना चाहिए, यह बतलाकर कि अतिकामुकता नाॅर्मल नहीं है और इलाज की जरूरत है।