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अंग दान व प्रत्यारोपण
February 23, 2019 • Suraj Rai

मानव अंग को दान करना एवं उसे दूसरे जरूरतमंद के शरीर में प्रत्यारोपित करना अब बहुत आसान हो गया  है। अंग दान को मिल रहा बढ़ावा एवं चिकित्सा विज्ञान के द्वारा उसके प्रत्यारोपण में सफलता के चलते आज दुनियां भर में यह संभव होता जा रहा है। आंख के कार्निया,हृदय, किडनी, पेन्क्रियाज, लिवर, हड्डी, हाथ पैर आदि तक को दान में मिलने पर दूसरे जरूरत मंद व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
.किसी भी व्यक्ति की मृत्यु उपरान्त निर्धारित समय के भीतर यदि उसका अंग मिल जाता है, तब यह दूसरे व्यक्ति के काम आ जाता है।  
किसी के शरीर से अंग को निकालना एवं किसी के शरीर में प्रत्यारोपण वैसे उतना आसान नहीं होता जितना कि लोग समझते हैं। यह बहुत जटिल एवं चुनौती भरा होता है जिसे जानकार एवं अनुभवी चिकित्सक ही कर पाते हैं। ऐसे समय में हर पल रोगी के लिए खतरनाक या जीवनदायी होता है। दानदाता के शरीर से हृदय को निकालने में 30 से 45 मिनट लगते हैं जबकि उसे दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित करने में तीन से चार घंटे का समय लगता है। दान में मिले हृदय को छह घंटे के भीतर ही प्रत्यारोपित हो जाना चाहिए।


भारत में सर्वत्र अंधविश्वास हावी हैं। जनचेतना एवं जागरूकता का अभाव है, इसलिए अंगदान करने बहुत कम लोग सामने आते हैं। इसी कारण जरूरतमंद लोगों के चेहरों पर खुशी की मुस्कान नहीं आ पाती और अंग के अभाव में मौत हो जाती है।
अंग दान के मामले में भारतीय बहुत पिछड़े हैं। कभी-कभार नेत्रदान करने के लिए कुछ लोग ही सामने आते हैं। जीवित व्यक्ति शपथपत्र भरकर मृत्यु उपरान्त अपने अंग का दान कर सकते हैं। जीवित परिजन भी अपने किसी संबंधी की मृत्यु के बाद उसके अंग को दान कर सकते हैं। यहां उपदेश देने वाले डाक्टर एवं समाज सेवी बहुत मिल जाते हैं किंतु स्वयं सामने आने वाले लोग बहुत कम होते हैं।
बहुत लोग अंगदान करने की घोषणा करते हैं एवं शपथ पत्र भरते हैं किंतु मृत्यु के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर उनके परिजन संबंद्ध अस्पताल को सूचित नहीं करते जिसके कारण दानदाता के अंग व्यर्थ ही शून्य हो जाते हैं, मिट्टी में मिल जाते है। इन्हीं विसंगतियों के कारण यहां अंगदान करने की परंपरा संस्कृति नहीं पनप पर रही है जबकि लाखों लोगों को आंख, किडनी, पेन्क्रियाज हृदय एवं लिवर आदि की जरूरत है।
यहां अंगों के जरूरतमंद लोगों की संख्या भी बहुत है। जीवित अवस्था में अपनी एक किडनी बेचने अनेक लोग सामने आते हैं किंतु मृत शरीर के अंग को दान देने के पीछे हट जाते हंै। इसीलिए यहां अंगदान एवं उसके प्रत्यारोपण में अपेक्षित कामयाबी नहीं मिल पा रही है।
यहां अंग जरूरतमंदों की कतार में क्रमवार आंख, किडनी, पेन्क्रियाज हृदय, लिवर, हाथ पैर एवं हड्डी हैं। अंग मिलने एवं उसके प्रत्यारोपण के बीच कुल समय सीमा इस प्रकार है। हृदय 6 घंटे, लिवर 8 से 12 घंटा, पेन्क्रियाज 8 से 12 घंटे, आंख 26 से 48 घंटे हैं। समय सीमा के बाद अंगदान एवं प्रत्यारोपण नाकाम हो जाता है। अतएव अंगदान दें एवं समय सीमा के भीतर उसे अंजाम भी दें।